शुक्रवार, 21 जुलाई 2023

‘यह बहुत बार होगा’ (कविता)

यह बहुत बार होगा

जो आप सोचते हैं 

जरूरी नहीं कि वह पूरा हो

हो सकता है वह अधूरा हो

अधूरा ही बना रहे

इस अधूरेपन में भी जीवन को

तराशा जा सकता है! 


यह बहुत बार होगा 

कि जो आप चाहते हैं

जरूरी नहीं कि वह पूर्ण हो

हो सकता है कि वह चाहना

चाहत ही बनी रहे

इस चाहते रहने पर भी जीवन को

तराशा जा सकता है! 


यह बहुत बार होगा 

कि जो आप माँगते हैं 

वह आपको मिले ही

हो सकता है कि आपको वह मिले

जो आपके लिए जरूरी हो

उम्मीद के मुताबिक भी नहीं मिले

पर, उम्मीद नहीं टूटनी चाहिए

उम्मीद के रहते जीवन को तराशा जा सकता है! 


@ डॉ. अखिलेश महस्वा

   (जिन खोजा, तिन पाइयाँ...!)

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