मंगलवार, 3 सितंबर 2024

विश्वविद्यालय से संबंधित लघुकथाएँ!


बैठक-1

अध्यापक कक्षा में आए। विद्यार्थी अपने स्थान पर खड़े हो गए। एक साथ सभी बोले - “सर, नमस्ते!”

सर भी बोले - “नमस्ते! आज फ़लाँ बैठक है। इसलिए आज यह क्लास नहीं होगी। यह सिलेबस है। इसमें ये इम्पोर्टेंट टॉपिक हैं। इन्हें तैयार कर लीजिएगा। कल आपका क्लास टेस्ट होना है।” 

सभी बच्चे चुप्प। कभी टीचर का मुँह ताके तो कभी आपस में एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे।


बैठक-2 

आज फिर बैठक का नोटिस निकला। दोपहर बारह बजे बैठक होनी है। बैठक के सूचना पत्रक पर हस्ताक्षर करते हुए पूछासर, क्लास का क्या होगा?

जवाब आया - “क्लास हो या हो, ज़रूरी नहीं है। बैठक ज़रूरी है। नैक का सवाल है। विश्वविद्यालय की रैंकिंग का सवाल है। इसलिए क्लास छोड़ दो। बैठक लो।

मुँह ताका। बिना कोई प्रतिक्रिया दिए हस्ताक्षर किए और बैठक में सम्मिलित होने के लिए बैठक कक्ष के लिए निकल गए। 


बैठक-3 

विभाग में बैठक हो रही है। सभी सदस्य बैठे हैं। अलग-अलग समितियाँ बनाई गईं। सभी समितियों के कोर्डिनेटर बनाया जाना ज़रूरी था। सो बनाए गए। 

आप इस समिति के कोर्डिनेटर हैं।

मुझे क्या करना होगा?”

कुछ काम हो या हो; बस, रिपोर्ट तैयार करना ज़रूरी है।

सभी सदस्यों को अपना-अपना जवाब मिल गया। सभी आपस में एक-दूसरे का मुँह ताकते रहे और तब तक बैठक समाप्त हो गई।